डीयू के बारे में
दिल्ली विश्वविद्यालय देश का प्रमुख विश्वविद्यालय है। यह उच्च स्तर के अध्यापन और अनुसंधान के लिए जाना जाता है। इसके संकाय प्रख्यात विद्धवानों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं । इसकी स्थापना 1922 में एकात्मक, शिक्षण एवं आवासीय विश्वविद्यालय के रूप में केन्द्रीय विधान सभा के एक अधिनियम द्वारा की गई थी। इसके विजिटर (कुलाध्यक्ष) भारत के राष्ट्रपति हैं इसके कुलाधिपति भारत के उपराष्ट्रपति हैं तथा सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश विश्वविद्यालय के सम कुलाधिपति हैं।
स्थापना के प्रारम्भ से ही दिल्ली विश्वविद्यालय की श्रेष्ठ अध्यापन और अनुसंधान की उत्कृष्टता के लिए प्रतिबद्धता ने इसे देश के दूसरे विश्वविद्यलयों के लिए एक आदर्श और पथ प्रदर्शक बना दिया है । इसकी समृद्ध शैक्षिक परंम्परा ने हमेशा से ही उन प्रतिभाशाली छात्रों को अपनी ओर आकर्षित किया है जिन्होंने समाज के निर्माण के लिए महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है।
जब विश्वविद्यालय की स्थापना हुई, दिल्ली में केवल तीन महाविद्यालय ही अस्तित्व में थे। जिनमें सेंट स्टीफंस महाविद्यालय की स्थापना 1881: हिन्दु महाविद्यालय की 1899 और रामजस महाविद्यालय की स्थापना 1917 में हुई । बाद में यह दिल्ली विश्वविद्यालय से सम्बद्ध हो गए। इस प्रकार विश्वविद्यालय ने सिर्फ तीन महाविद्यालयों के साथ बहुत साधारण सी शुरूआत की । आरम्भ में दो संकायों (कला और विज्ञान) के लगभग 750 विद्यार्थी थे । अक्टूबर 1933 में विश्वविद्यालय का कार्यालय और पुस्तकालय वाइस-रीगल लॉज एस्टेट में स्थानांतरित कर दिया गया और आजतक यह स्थान विश्वविद्यालय के मुख्य कार्यों के कार्यालय ग्रह के रूप में स्थित है । वर्तमान में, यह विश्वविद्यालय भारत का सबसे बड़ा विश्वविद्यालय बन गया है। हाल में, 16 संकाय, 86 शैक्षणिक विभाग, 77 महाविद्यालय और 5 अन्य मान्यता प्राप्त संस्थानों में 132435 नियमित छात्रों के साथ (यूजी: 114494, पीजी: 17941) और 261169 विद्यार्थी (यूजी: 258831, पीजी: 2338) अनौपचारिक शिक्षण कार्यक्रम के छात्रों के साथ पूरे शहर में फैल रहे हंै।
सर मॉरीस गव्यार , कुलपति ने इस प्रतिष्ठित संकाय के महत्व को समझ कर, जो एक रोल मॉडल (आदर्श) की भूमिका अदा कर सके, ऐसी प्रतिभाओं की देशभर में खोज की । भौतिकी में प्रो. डी.एस. कोठारी, रसायन शास्त्र में प्रो. पी. आर. शेषाद्री, वनस्पति विज्ञान में प्रो. पी. महेश्वरी ज़ूलॉजी में एम. एल. भाटिया जैसे व्यक्तियों को इस विश्वविद्यालय की श्रेष्ठता के रूप में उतारा।
पाँच विभागों; जिनमें रसायन विज्ञान, भू विज्ञान, ज़ूलॉजी, समाज शास्त्र और इतिहास को विस्तृत अध्ययन केन्द्र का दर्जा प्रदान किया गया है। इन विस्तृत अध्ययन केन्द्रों ने अपनी शिक्षण और अनुसंघान की उत्कृष्टता से संबंधित क्षेत्रों में जगह बना ली है। इसके अलावा, विश्वविद्यालय के विभागों की एक अच्छी संख्या अपने शैक्षणिक कार्य के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की विशेष सहायता कार्यक्रम के तहत अनुदान प्राप्त कर रहे हैं। दस विभागों (यूरोपीय , रोमनस स्टडीज़ , हिन्दी, फारसी, भूगोल, संगीत, ईस्ट एशियन स्टडीज़ मानव विज्ञान, गणित, बी. आर. अम्बेडकर, एम. आइ. एल.) को डीआरएस के तहत अनुदान मिल रहा है। दो विभागों (बौद्ध अध्ययन, अंग्रेजी) को डीएसए, तीन विभागों (अंग्रेजी, बौद्ध अध्ययन, समाजिक कार्य) को एआईएसएचएसएस और तीन विभागों (अफ्रीकी अध्ययन, पूर्व एशियाई अध्ययन, विकासशील देशों का अनुसंधान केन्द्र) को क्षेत्र अध्ययन कार्यक्रमों के अंतर्गत अनुदान मिल रहा है। व्यस्क विभाग, सतत् शिक्षा और विकास तथा नारी शिक्षा एवं विकास केन्द्र भी विश्वविद्यालय अनुदान आयोग से विशेष सहायता राशि प्राप्त कर रहे हैं । आज इस विश्वविद्यालय में महाविद्यालयों के पुस्तकालयों के अतिरिक्त 15 बड़े पुस्तकालय भी हैं। यूनिवर्सिटी ऑफ़ सांइस इंस्ट्रयूमंेटेशन सेन्टर (यूएसआईसी), जो अब भौतिकी और रसायन विभाग स्थल के बिल्कुल पास है। यह एक परिष्कृत और सबसे उच्च अनुसंधान उपकरण है। इन उपकरणों का प्रयोग विश्वविद्यालय के स्नात्तकोत्तर विभाग के शिक्षकों और शोध छात्रों के द्वारा, साथ ही दिल्ली और उसके आसपास के अन्य संस्थानों के द्वारा किया जाता है। हाल ही में विश्वविद्यालय ने उत्तर और दक्षिण परिसर से सभी कालेजों और विभागों को जोड़ने के लिए फाइबर आप्टिक नेटवर्क की योजना बनाई है।
जब दिल्ली शहर का अनेक दिशाओं में तेजी से विस्तार हो रहा था तब शहर के साथ तालमेल रखने के लिए 1973 में दक्षिणी परिसर की स्थापना की गई। दिल्ली के निवासियों की सुविधा के लिए इसे 1984 में वर्तमान स्थान धौला कुआँ के पास बेनिटो जुआरेज रोड पर ले जाया गया। यह परिसर 69 एकड़ हरी-भरी पहाड़ी क्षेत्र पर फैला हुआ है। यह भवन अपने प्राकृतिक वातावरण के साथ बड़ा ही आकर्षक लगता है। कला संकाय में विभिन्न विभागों के साथ अंतर अनुशासनात्मक और एप्लाइज़ साइंसेस भी स्थित है। एस पी जैन मैनेजमेंट स्टडीज़ सेन्टर भी दक्षिणी दिल्ली परिसर में स्थित हे। इसके अलावा परिसर में एक अच्छा पुस्तकालय, स्वास्थ्य केन्द्र, बैंक, पोस्ट ऑफिस, डी. टी. सी. पास विभाग और प्रशासनिक और परीक्षा ब्लॉक भी हैं। दक्षिण परिसर में अध्यापक वर्ग और गैर अध्यापन कर्मचारियों के लिए कुछ आवास भी हैं। बाहरी छात्रों के लिए तीन हॉस्टल आवास की पेशकश की जा रही है।