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दिल्ली विश्वविद्यालय एवं शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के संयुक्त तत्वावधान में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 एवं इसके क्रियान्वयनको लेकर गोष्ठी का आयोजन


प्रैस विज्ञप्ति

दिल्ली विश्वविद्यालय एवं शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के संयुक्त तत्वावधान में आज राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 एवं इसके क्रियान्वयन को लेकर गोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमें दिल्ली विश्वविद्यालय के लगभग 60 प्राचार्यों ने भाग लिया | गोष्ठी का उद्घाटन दीप प्रज्ज्वलन कर वैदिक मंत्रोचार से हुआ | गोष्ठी के प्रास्ताविक वक्तव्य में दिल्ली विश्वविद्यालय के डीन ऑफ़ कोलेजेज  प्रो. बलराम पाणी जी ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वयन के सम्बन्ध में अपने विचार रखते हुए कहा की शिक्षानीति के क्रियान्वयन में भारतीय अवधारणा का ध्यान रखना चाहिए | दिल्ली विश्वविद्यालय के कार्यकारी कुलपति प्रो.पी.सी.जोशी जी ने कहा की हमने दिल्ली विश्वविद्यालय में शिक्षानीति क्रियान्वयन की 48 सदस्यीय  समिति का गठन किया है व आने वाले समय में हम अनेक कार्यक्रम भी इसके क्रियानव्यन को लेकर अपने विश्वविद्यालय में करने वाले हैं | उन्होंने  कहा की शिक्षानीति के क्रियान्वयन में हम उन सभी  शिक्षाविदों के विचारों को भी इसमें सम्मिलित करेंगे  जो  शिक्षा के क्षेत्र में नावाचार कर रहे हैं  | शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के राष्ट्रीय सचिव श्री अतुल कोठारी जी ने सभी को संबोधित करते हुए कहा की शिक्षानीति का सबसे महत्वपूर्ण कार्य इसका सभी शिक्षण संस्थाओं में क्रियान्वयन है | उन्होंने कहा की यह 150 वर्षों के बाद भारत की संस्कृति के अनुरूप शिक्षानीति आई है | स्वतंत्र भारत के पश्चात यह तीसरी शिक्षानीति है जो वर्ष 2020 में आई है  | इससे पूर्व वर्ष 1968 और वर्ष 1986 में शिक्षानीति आई थी, लेकिन ये दोनों ही शिक्षानीति भारतीय समग्रता के भाव से दूर थी|  रिसर्च को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय अनुसंधान फाउण्डेशन की स्थापना की जाएगी । पृथक से बी.एड. कॉलेज बंद किये जाने का सामान्य कॉलेजों से चार साल की बी.एड. कोर्स लागू होगा । सरकारी और निजी उच्च शिक्षा संस्थानों के लिए एक समान मानदंड तय किये जाएंगे।

             राष्ट्रीय शिक्षा नीति का उद्देश्य ऐसे नागरिकों का निर्माण करना है जो विचारों से, कार्य व्यवहार से एवं बौद्धिकता से भारतीय बने। इस उद्देश्य की पूर्ति हेतु नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में शिक्षा के अलग-अलग स्तरों पर सभी विषयों में भारतीय ज्ञान परंपरा, कला, संस्कृति एवं मूल्यों का समावेश की बात कही गयी है।

            इस शिक्षा नीति में वर्तमान शिक्षा प्रणाली के विभक्त स्वरुप को दूर करते हुए शिक्षा को समग्र दृष्टि देने का कार्य किया है। शिक्षा के सभी स्तरों पर पाठ्यक्रम में तालमेल बनाया जाएगा। छात्रों के समग्र विकास को बढ़ावा देने की बात। पाठ्यक्रम, पाठ्येतर एवं सह पाठ्यक्रम के साथ ही कला, मानविकी एवं विज्ञान और व्यवसायिक एवं शैक्षणिक जैसा सभी विषयों के पाठ्यक्रम का ही हिस्सा माना जाएगा।  

            समावेशी शिक्षा हेतु पिछड़े वर्ग के छात्रों हेतु विद्यालयों के निर्माण को बढ़ावा देने की दृष्टी से विद्यालय की न्यूनतम आवश्यकताओं को कम प्रतिबंधात्मक बनाने का प्रस्ताव हैं। छात्राओं की शिक्षा को बढ़ावा देने हेतु एक विशेष 'जेंडर समावेशी कोष' (Gender Inclusion Fund) बनाया जाएगा। स्वतंत्रता पश्चात पहली बार ऐसा हुआ है कि सामाजिक-आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग के छात्रों में शिक्षा को बढ़ावा देने हेतु ‘विशेष शिक्षा क्षेत्र’ (एसईज़ेड / SEZ) की संकल्पना रखी गयी है ।पिछड़े वर्ग की शिक्षा हेतु विशेषरूप से उपयुक्त धनराशि सुनश्चित करना। पाठ्यक्रम को और अधिक समावेशी बनाना। विशेष शिक्षा क्षेत्रों में भारतीय भाषाओं में शिक्षण देने वाले उच्च शिक्षा संस्थानों को बढ़ावा दिया जाएगा।

            वर्ष 2025 तक कम से कम 50% विद्यार्थी, विद्यालयीन एवं महाविद्यालयीन दोनों स्तरों पर, व्यावसायिक शिक्षा का ज्ञान अर्जित करेंगे। अगले एक दशक में व्यावसायिक शिक्षण को धीरे-धीरे मुख्य शिक्षा की धारा में ही समावेश कर लिया जाएगा। जिससे शिक्षा की समग्रता का लक्ष्य प्राप्त हो सकें। माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक स्तर से ही व्यावसायिक शिक्षण को बढ़ावा दिया जाएगा। कक्षा 6 से कक्षा 8 पाठ्यक्रम में राज्य स्तर एवं स्थानीय समुदाय के महत्वपूर्ण व्यवसायिक कला, हस्तकला आदि का समावेश। कक्षा 6 से कक्षा 12 तक के छात्रों हेतु विविध व्यावसायिक क्षेत्रों में इंटर्नशिप की व्यवस्था। उच्च माध्यमिक स्तर के विद्यालय विविध आईटीआई, पॉलीटेक्निक महाविद्यालयों, स्थानीय उद्योग आदि के साथ संलग्न हो सहयोग से कार्य करेंगे।

             इस शिक्षा नीति से चरित्र निर्माण एवं व्यक्तित्व का समग्र विकास होगा । शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास अपने गठन से ही शिक्षा में बदलाव को लेकर पूरे देश में मुहिम चला रहा था । शिक्षा में बदलाव से राष्ट्रीयता के भाव के साथ ही छात्रों के व्यक्तित्व का समग्र विकास होगा। इस नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के कार्यान्वयन से भारत के युवा वैश्विक प्रतिस्पर्धा में अग्रणी भूमिका निभा सकेंगे ।शिक्षानीति में स्थानीय भाषा, स्थानीय आवश्कताओं आदि पर भी विचार किया गया हैं |  हम क्रियावयन की बात करते है तो सबसे पहले हमें इसका अध्ययन अपने सभी शिक्षण संस्थाओं में कराना चाहिए | क्रियान्वयन को हर शिक्षण संस्थान में पहुचाने के लिए व्याख्यान कार्यशाला आदि का आयोजन सभी शिक्षण संस्थाओं को करना चाहिए | सभी शिक्षण संस्थाओं में शिक्षानीति के क्रियान्वयन को लेकर समितियों का गठन होना चाहिए | कार्यक्रम के अध्यक्ष चौ. बंसी लाल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आर. के. मित्तल जी ने शिक्षानीति के क्रियान्वयन को लेकर भावी योजनाओं को सबके सम्मुख रखा|  दिल्ली विश्वविद्यालय के दक्षिण परिसर के निदेशक प्रो. सुमन कुंडू जी ने आगत सभी अतिथियों का धन्यवाद किया | गोष्ठी का संचालन दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. विकास गुप्ता जी ने किया |  

कुलसचिव
दिल्ली विश्वविद्यालय

15 जनवरी 2021

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Last Updated: Jan 15, 2021
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